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डायबिटीज की समसà¥à¤¯à¤¾ से करोड़ों लोग जूठरहे हैं. यह बीमारी पà¥à¤°à¤®à¥à¤– तौर पर दो तरह की होती है. पहली टाइप 1 डायबिटीज (T1D) और दूसरी टाइप 2 डायबिटीज (T2D). टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों के शरीर में इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ बनना बंद हो जाता है या बेहद कम मातà¥à¤°à¤¾ में बनता है. टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के शरीर में इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ तो बनता है, लेकिन इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ रजिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚स की वजह से उसका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं हो पाता. इन दोनों ही कंडीशन में मरीज का बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल बढ़ जाता है. इस बीमारी से जूठरहे लोगों को रोज शà¥à¤—र लेवल चेक करने की सलाह दी जाती है, ताकि इसकी सही तरीके से मॉनिटरिंग की जा सके.
अब सवाल उठता है कि कà¥à¤¯à¤¾ डायबिटीज के मरीजों को रोज बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र चेक करने की जरूरत होती है? अगर हां, तो दिन में कितनी बार शà¥à¤—र चेक करनी चाहिठऔर किस वकà¥à¤¤ चेक करना सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फायदेमंद होता है. इन सà¤à¥€ सवालों के जवाब डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जान लेते हैं. उनसे यह à¤à¥€ जानेंगे कि डायबिटीज का लेवल कितना होना ठीक माना जा सकता है और किस कंडीशन में लोगों को डॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलने की जरूरत होती है.
कितनी बार चेक करें शà¥à¤—र लेवल?
नई दिलà¥à¤²à¥€ के सर गंगाराम हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² के पà¥à¤°à¥€à¤µà¥‡à¤‚टिव हेलà¥à¤¥ डिपारà¥à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट की डायरेकà¥à¤Ÿà¤° डॉकà¥à¤Ÿà¤° सोनिया रावत कहती हैं कि शà¥à¤—र के मरीजों को दिन में कम से कम 2 बार अपना बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल चेक करना चाहिà¤. बà¥à¤°à¥‡à¤•फासà¥à¤Ÿ से पहले और लंच या डिनर के 2 घंटे बाद शà¥à¤—र लेवल चेक करना जरूरी माना जाता है. अगर आप दो बार नहीं कर पा रहे तो कम से कम à¤à¤• बार शà¥à¤—र लेवल चेक जरूर करें. खाने से पहले आपका बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल 100 mg/dL से कम होना चाहिठऔर खाने के बाद 180 mg/dL से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नहीं होना चाहिà¤. अगर शà¥à¤—र लेवल इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलकर कंसलà¥à¤Ÿ करें.
à¤à¤¸à¥‡ मरीज 3-4 बार शà¥à¤—र लेवल करें चेक
डायबिटीज के जो मरीज इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ ले रहे हैं, इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ की डोज लेने से पहले हर बार अपना बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लेवल चेक करना चाहिà¤. कà¥à¤› लोगों को दिन में 2-3 बार और कà¥à¤› लोगों को 4 बार इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ लेने की सलाह डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दी जाती है. आमतौर पर इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को दी जाती है. टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों का शà¥à¤—र लेवल कंटà¥à¤°à¥‹à¤² नहीं होता, तब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ की डोज दी जाती है.
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